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खूबसूरती

                
                                                         
                            अनसुना मंजर लगती हो,
                                                                 
                            
अनगढ़ा गौहर लगती हो I

डूबने के सिवा करता भी क्या ,
तुम सातों समुंदर लगती हो I

कभी फुहार रिमझिम रिमझिम ,
कभी हवा सी सरसर लगती हो I

निगाहें, नीयत, दिल सब फिसले
मिट्टी से बना संगमरमर लगती हो I

खूबसूरती देखी तरह-तरह की 'देव' '
तुम तरह-तरह से सुंदर लगती हो I 
-देवेन्द्र पंत
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3 महीने पहले

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