ये दिल टूटा नहीं है, इंतजार में है,
तुम लौट आओगे, पूरा ऐतबार है इसे।
जो छोड़ गए थे तुम तन्हा राहों में,
उन्हीं मोड़ों से आज भी प्यार है इसे।
हवाएं जब भी छू कर गुज़रती हैं यहाँ,
लगता है कि तेरा ही इकरार है इसे।
तू आये न आये दिल देख लेगा ख़ुद,
आज शमा जलाने से सरोकार है इसे।
-देवेन्द्र पंत
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