आसान नहीं होता अकेले रहना - चाय के दो कप में से,
एक को हमेशा के लिए हटा देना।
आसान नहीं होता,
घर लौटकर ताला खोलना,
और यह जानते रहना कि अंदर कोई इंतज़ार में नहीं है,
सिवाय उस पसरे हुए सन्नाटे के,
जो आते ही और गहरा हो जाता है।
आसान नहीं होता,आईने को बताना कि तन्हाई से क्या मिला I कोई पूछे तो कह देना कि
'सब ठीक है',
और अंतस में बिंधते हुए इस झूठ को
सहते जाना I
आसान नहीं होता अकेले रहना -
यह हुनर हर किसी को नहीं आता—
कि जब दिल उदास हो,
तो खुद ही अपना हाथ थामना,
खुद की पीठ थपथपाना,
और हौसले से कहना,
"कोई बात नहीं,
कल का दिन बेहतर होगा।"
अकेले रहना
खुद के भीतर समंदर झेलना है,
जिसकी लहरें कभी-कभी
सुनामी हो उठती हैं।
आसान नहीं होता अकेला होना I
-देवेन्द्र पंत
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X