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आख़िरी ख़त

                
                                                         
                            शायद ये आख़िरी ख़त हो,
                                                                 
                            
मैं वापस न लौट सकूँ।

घड़ी में सुबह के चार बजे हैं।
शायद ये आख़िरी ख़त हो,
मैं वापस न लौट सकूँ।

मैं जानता हूँ, तुम मेरी हो।
इस बार वापस आना हुआ तो
वो पीली साड़ी पहनना।

न लौट सकूँ तो
वो सफेद वस्त्र ओढ़ लेना,
मगर उसमें मनचाहे रंग भरना,
मनचाहे रंग भरना।

तुम्हारी दी हुई घड़ी
इस ख़त के साथ भेज रहा हूँ।
न लौट सका तो
मेरे साथ ही दफ़ना देना।

उस वक़्त का मिट जाना ही अच्छा है
जो मैं तुम्हें न दे सका।
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2 महीने पहले

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