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मैं लिखूंगा

                
                                                         
                            मैं लिखूंगा,
                                                                 
                            
और तब तक लिखूंगा,
जब तक मेरी उंगलियां साथ देगी।
जब तक मेरी आत्मा न मात देगी।।

मैं लिखूंगा,
लिखूंगा वो सब,
जो शायद तुम कहने से डरते हो ।
और रोज तिल-तिल सोचकर मरते हो।।

मैं लिखूंगा,
बेटियों की चीख लिखूंगा ।
मैं लिखूंगा,
भिखारी की भीख लिखूंगा।।

मैं लिखूंगा,
गरीब पर हुआ अत्याचार लिखूंगा।
मैं लिखूंगा,
बच्चों पर हुई मार लिखूंगा ।।

मैं लिखूंगा,
उस पर जो तुम्हारे अधिकारों को मौन बनाए।
मैं लिखूंगा,
उस पर जो तुम पर धौंस जमाए।।

मैं लिखूंगा,
जुल्म की हर दास्तां लिखूंगा।
मैं लिखूंगा,
प्रेम का वो रास्ता लिखूंगा।।

मैं लिखूंगा,
तुम्हारे संकेतों की आवाज लिखूंगा।
मैं लिखूंगा,
नेताओं का हिसाब लिखूंगा।

मैं लिखूंगा,
मानवता पर हुआ प्रहार लिखूंगा।
मैं लिखूंगा,
ज्ञानहीन को गवार लिखूंगा।।

मैं लिखूंगा,
एकता का प्रमाण लिखूंगा।
मैं लिखूंगा,
आती हुई बाढ़ लिखूंगा।।

मैं लिखूंगा,
वीर का बलिदान लिखूंगा।
मैं लिखूंगा,
निकलते हुए प्राण लिखूंगा।।

मैं लिखूंगा ,
लाचार की गुहार लिखूंगा।
मैं लिखूंगा,
जीवन का सार लिखूंगा।।

मैं लिखूंगा,
तुम्हारे देह में धंसी,
कीलों की गहराई लिखूंगा।
मैं लिखूंगा,
तुम्हारे संघर्ष की लड़ाई लिखूंगा।।

मैं लिखूंगा,
भूख हड़ताल लिखूंगा।
मैं लिखूंगा,
तुम्हारे एकता की मिसाल लिखूंगा।।

मैं लिखूंगा,
भगत सिंह का इंकलाब लिखूंगा।
मैं लिखूंगा,
देश को आजाद लिखूंगा।।

मैं लिखूंगा।
मैं लिखूंगा।।
 
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3 महीने पहले

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