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फ़ासलों ने जिस्म जुदा कर दिए

                
                                                         
                            कुछ मेरे माज़ी में मेरा रह गया,
                                                                 
                            
साथ यादों का काफ़िला रह गया।

लौट आया मैं तेरे शहर से मगर,
मेरे दिल का एक हिस्सा रह गया।

तर्क-ए-मोहब्बत के बाद मेरे साथ,
हिज़्र-ओ-ग़म का ही सिला रह गया।

फ़ासलों ने जिस्म जुदा कर दिए,
बाक़ी अब तक तेरा नशा रह गया।

कहते हैं बिछड़े सभी भूल जाते हैं,
पर ज़ेहन में अक़्स तेरा रह गया।

मेरी ख़ल्वतों के जहाँ में "शमीम" ,
रूह में तेरा ही रास्ता रह गया।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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एक घंटा पहले

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