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तुम गए और साथ में तुम्हारा प्यार गया

                
                                                         
                            तुम गए और साथ में तुम्हारा प्यार गया,
                                                                 
                            
वक्त बदला नशा उल्फ़त का उतार गया।

तल्ख़ यादें गुज़श्ता वक़्त से वाबस्ता हैं,
हम हैं तन्हा अब वो दौर मुस्तआर गया।

तुम से मिलने को बे-क़रार रहा करते थे,
पहले जो था तुम्हारा शौक़-ए-दीदार गया।

तोड़कर दिल हमारा दर-बदर किया हम को,
तुम से शिक़वा करें हमारा इख़्तियार गया।

यक़ीं तुम पर था तुम ही हमारे हो न सके,
जज़्बा-ए-मोहब्बत से हमारा ए'तिबार गया।

फूल कम हैं और ख़ार ज़ियादा हैं "शमीम"
रह-ए-उल्फ़त चला दामन-ए-तार-तार गया।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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एक महीने पहले

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