नेक जो भी हैं यहाँ पर वो अकेले होंगे,
नकाब चेहरे पर पहने हुए चेहरे होंगे।
ज़ुल्मते-शब है तो थोड़ा इंतज़ार करो,
रात ढल जाएगी तो रौशन सवेरे होंगे।
वक्त के साथ वक्त का बदलना तय है,
बुलंदी पर सितारे एक दिन अपने होंगे।
ज़माने भर के मोहब्बत पर पहरे होंगे,
ज़ुबाँ पर सबकी हमारे ही क़िस्से होंगे।
यूँ ही ख़ामोश रहोगे तो कैसे बात बनेगी,
दिल के अरमाँ दिलबर को जताने होंगे।
"शमीम" हम भी तेरी बज़्म में हाज़िर हैं,
तेरी नज़र चंद अशआर भी कहने होंगे।
-देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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