गुज़रेगी शब अंधेरा जाएगा,
सुब्ह आफ़ताब आ जाएगा।
मालो-ज़र सब यहीं रह जाएगा,
तू जहाँ से अकेला जाएगा।
जो भी तू औरों के लिए करेगा,
बस वही याद रक्खा जाएगा।
हम न होंगे जब इस जहाँ में,
हम को भुला दिया जाएगा।
वक्त अच्छा नहीं तो ग़म न कर,
हमें कुछ तो ये सिखा जाएगा।
जो भी चाहेंगे शिद्दत से "शमीम"
वही क़िस्मत में लिक्खा जाएगा।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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