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हसरते-दिल कही नहीं जाती।

                
                                                         
                            ये फ़िक्रे-आलमी नहीं जाती,
                                                                 
                            
हसरते-दिल कही नहीं जाती।

चाहता हूं मैं हाले-दिल सुनाना
कशमकश है बड़ी नहीं जाती।

बंदिशें हैं रस्मो-रिवाजों की,
तुम से दूरी सही नहीं जाती।

जब से तुम से मिली मेरी नज़रें,
हुई वो बेख़ुदी नहीं जाती।

एक आदत सी बन गई हो तुम,
कोशिशें कर के भी नहीं जाती।

मिरा जौक-ए-जुनून है "शमीम"
दिल की दीवानगी नहीं जाती।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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52 minutes ago

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