ऐसा नहीं कि ग़म मिला नहीं है,
मगर ये दिल ग़मज़दा नहीं है।
जो भी तय है यक़ीनन होना है,
जो सोचते हैं वो होता नहीं है।
सोते सोते भी क़िस्मत जागती है,
वो हो जाता है जो सोचा नहीं है।
एक रब ही तो तेरा आसरा है,
सिवा उसके कोई तेरा नहीं है।
जो तेरा हक़ है यक़ीनन मिलेगा,
कभी नाहक़ यहां मिलता नहीं है।
राह में पत्थर हैं सुलगते हुए,
ये फूलों से भरा रस्ता नहीं है।
चलते जाना ही ज़िन्दगी है "शमीम",
मिलेगी मंज़िल गर ठहरा नहीं है।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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