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बेमिसाल हुस्न

                
                                                         
                            तेरा चेहरा है या माहतब कोई,
                                                                 
                            
सुर्ख़ लब हैं खिला गुलाब कोई।

बेमिसाल हुस्न बख़्शा है ख़ुदा ने
नहीं जमाल का तेरे जवाब कोई।

तेरी नज़र से बेख़ुदी हो जाती है,
नशा ऐसा कहाँ देगी शराब कोई।

बहुत कुछ इनमें पढ़ लेते हैं हम,
ये आँखें तो हैं जैसे किताब कोई।

तेरे ख़यालों से आबाद है मेरा जहां,
देख लेता हूँ इश्क का ख़्वाब कोई।

नूर है तेरे ही दम से मेरी दुनिया में,
"शमीम" तू है जैसे हो आफ़्ताब कोई।
-देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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3 महीने पहले

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