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मेरे सवाल पर झुकी नज़रें,

                
                                                         
                            आप जब बेनक़ाब होते हैं,
                                                                 
                            
क़सम से लाजवाब होते हैं।

मेरी आँखों में जागते, सोते,
बस आप के ख़्वाब होते हैं।

आप के लब जो मुस्कुराते हैं,
शोख़ खिलते गुलाब होते हैं।

ख़फ़ा जो आप हमसे होते हैं
सबब-ए-इज़्तिराब होते हैं।

मेरे सवाल पर झुकी नज़रें,
ये अंदाज़-ए-जवाब होते हैं।

"शमीम" मेरी ज़ुल्मते-शब में,
आप इक माहताब होते हैं।
- देवेन्द्र सचदेवा "शमीम"
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एक घंटा पहले

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