अकेले चलकर तो रास्ता कट जाता है,
पर मंज़िल तभी बनती है जब कारवां साथ चलता है।
सामाजिक जीवन का अर्थ यही है,
कि गिरे तो उठाने वाला कोई हाथ हो,
और उठो तो तालियाँ बजाने वाले भी कई हों।
अपने लिए जिया तो क्या जिया,
जीना है तो वो जियो -
कि तुम्हारी एक मुस्कान से,
किसी और का दिन बन जाए।
पद, पैसा, प्रतिष्ठा - सब अकेले के लिए नहीं,
ज्ञान बाँटने से बढ़ता है,
और सम्मान - सबको साथ लेकर चलने से।
याद रखो -
बड़ा आदमी वो नहीं जिसके आगे लोग झुकें,
बड़ा वो है जिसके साथ लोग चलना चाहें।
इसलिए उठो,
सिर्फ अपना घर नहीं, अपना समाज सजाओ,
क्योंकि मेहनत से सफलता मिलती है,
पर सामाजिकता से सफलता अमर हो जाती है।
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