आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हम ही वो हैं जो दर्द बिना जीना भूल गए हैं

                
                                                         
                            दर्द आया था तो हमने भी उसे अपना लिया
                                                                 
                            
उसने घर माँगा तो दिल में ही बसा लिया

हमने कहा ठहर जा, कोई और ठिकाना नहीं
उसने सुना तो उम्र भर का रास्ता भुला दिया

कभी वो लफ्ज़ों में ढल के हमें ही लिख गया
कभी वो आँखों में ठहर के हमें ही पढ़ लिया

लोग कहते हैं तेरी आँखों में कुछ और है
उन्हें क्या पता तू है और तेरा दर्द है

अब शिकायत नहीं कि वो जाता नहीं कहीं
हम ही वो हैं जो दर्द बिना जीना भूल गए हैं
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर