दर्द आया था तो हमने भी उसे अपना लिया
उसने घर माँगा तो दिल में ही बसा लिया
हमने कहा ठहर जा, कोई और ठिकाना नहीं
उसने सुना तो उम्र भर का रास्ता भुला दिया
कभी वो लफ्ज़ों में ढल के हमें ही लिख गया
कभी वो आँखों में ठहर के हमें ही पढ़ लिया
लोग कहते हैं तेरी आँखों में कुछ और है
उन्हें क्या पता तू है और तेरा दर्द है
अब शिकायत नहीं कि वो जाता नहीं कहीं
हम ही वो हैं जो दर्द बिना जीना भूल गए हैं
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