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मनाती रहूँगी

                
                                                         
                            तू माने न माने मनाती रहूँगी।
                                                                 
                            
जो वादा है मेरा,निभाती रहूँगी।।
तू माने,,,

कभी तो रहम तुझे आयेगा मुझपे,
तेरे नश्तर भी हँस हँस के खाती रहूँगी।
तू माने,,,,

न कहूँगी कि तू बेवफा हो गया है,
तू मजबूर है, ये बताती रहूँगी।
तू माने,,,,

कुछ मेरे हक में करे न करे तू,
मैं तुझ पे दुआयें लुटाती रहूँगी।
तू माने,,,

न शिकवा करूँगी, न इल्जाम दूँगी,
मेरा ही गुनाह है ,सुनाती रहूँगी।
तू माने,,,,

कभी तो कलेजा पिघलेगा तेरा,
मैं अश्कों से पत्थर गलाती रहूँगी।
तू माने,,,,

तू आना न आना, तेरा ईमान जाने,
मै हर रात खुद को सजाती रहूँगी।
तू माने,,,

तुझे छूने भर की, तमन्ना है दिल में,
ख्वाबों में लबों को छुआती रहूँगी।
तू माने,,,,
-देवेन्द्र सिंह चौहान
 
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47 मिनट पहले

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