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हाँ हाँ,,,, मैं हिन्दी हूँ

                
                                                         
                            हाँ हाँ,,,,,, मैं हिन्दी हूँ।
                                                                 
                            
हाँ हाँ,,,,, मैं हिन्दी हूँ।
मेरा ऐसा हाल बना डाला,खुद ही खुद शर्मिंदी हूँ
हाँ,,,,,

कल भारत की परिभाषा थी,
हर हृदय की अभिलाषा थी,
इस धरती का ध्रुव तारा थी,
मै ही जयहिंद का नारा थी,
मेरी अनमोल कहानी थी ,
मै भाषाओं की रानी थी,
अब अपने घर में दासी हूँ, घुट घुटकर बस जिंन्दी हूँ
हाँ हाँ,,, ,,,

मै तुलसी की चौपाई में,
मै वेदों की गहराई में,
रसखान के स्नेह गीत में मै,
मीरा की पावन प्रीत में मै,
मै बहन की रेशम डोरी में,
मैया की मधुरम लोरी में,
गंगा की निर्मल धारा हूँ,,क्यों समझ रहे मै गंदी हूँ
हाँ हाँ,,,,,,

क्यों मुझको ठुकराते हो?
सौतन का मान बढ़ाते हो,
फिर मुझको अपनाओ तो,
सीने से मुझे लगाओ तो,
जन जन का मान बनूंगी मै,
भारत की शान बनूंगी मै,
श्रंगार हूँ भारत माता का, मस्तक की सुहानी बिंदी हूँ
हाँ हाँ,,,,,,,,, मै हिन्दी हूँ
हाँ हाँ,,,,, , मै हिन्दी हूँ
हाँ हाँ,, , मै हिन्दी हूँ
-देवेन्द्र चौहान
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3 घंटे पहले

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