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चुपके चुपके रोता हूँ

                
                                                         
                            अंँखियांँ छलकती हैं ,तन्हा जब भी होता हूँ।
                                                                 
                            
दर्दे दिल न जाहिर हो, चुपके चुपके रोता हूँ।।
अँखियाँ,,,,,
रात दिन गुजरते हैं ,ख्वाबों और खयालों में,
न जाने कब मैं जगता हूँ,न जाने कब मैं सोता हूँ।
दर्दे दिल,,,,
तेरे ही खतूतों में, मेरे दिल की दौलत है,
रोज रोज गिनता हूँ, रोज ही संजोता हूँ।
दर्दे दिल,,,
तेरे कस्मों वादों पे, यकीं था, यकीन है,
जन्मों के इरादे हैं, जन्मों से ही ढोता हूँ।
दर्दे दिल,,,,
जख्म जब कुरेदूं तो, दर्द बहुत होता है,
मगर दर्द मीठा है, सुबह शाम धोता हूँ।
दर्दे दिल,,,
इस जिन्दगी का जीना क्या,रोते रोते कटती है,
इक पल की मुस्कराहट की, रोज राह जोहता हूँ।
अँखियाँ छलकती हैं,,,,
दर्दे दिल,,,,
-देवेन्द्र सिंह चौहान
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एक घंटा पहले

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