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उत्सुक मन को खुशी मिली है

                
                                                         
                            मौसम के इस सुहाने पल में,
                                                                 
                            
उत्सुक मन को खुशी मिली है।
आँखें बिछती रही आंगन में,
मूर्छित मन को हँसी मिली है।।१।।

बेरुख मौसम बीत गए अब,
तुझ सम नव ज्योति मिली है।
शीतल छाया खोज रही थी,
ये बादल बर्षा टपक पड़ी है।।२।।

ठंडी छांव में सिरहाने लगी थी,
गरम हवा भी बदलने चली है।
गम के साए हमसे दूर होकर,
मीठी बातें तो खूब मचली है।।३।।

आँखों में पानी सुख रही थी,
आँचल में दूध उमड़ने लगी है।
जीवन धारा तो उछल रही थी,
तेरे आने से ही बदलने लगी है।।४।।
-देवनन्दन कुमार
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3 महीने पहले

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