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प्रेम आलंबन से मन प्रसन्न मेरा

                
                                                         
                            मम्मी पापा तूने हर पल दिया सहारा,
                                                                 
                            
मन प्रसन्न हुआ प्रेम आलंबन से मेरा।
खड़ा हुआ हूं जबसे देख रहा हूं तबसे,
वंदन है, अभिनंदन है, अर्पण सब मेरा।।१।।

मैं शैतान नहीं, पत्थर दिल इंसान नहीं,
तेरे संगम तट की पहचान बनूं अबसे।
विश्वास के पथ पर चलकर साथ रहेंगे,
छत्रछाया में पलकर ज्योतित रहूं रबसे।।२।।

मन मैला न करना तुझसे मैं कहता हूं,
तेरे बताए पथ पर ही चलता रहता हूँ।
छोटा सा बालक हूँ बातें सब सुनता हूँ,
अनभिज्ञ, अनजान हूँ पर मैं कहता हूँ।।३।।

रहते हो मैं हंसता हूँ या रोता रहता हूँ,
तेरे बाहों में सदा रहने को मचलता हूँ।
प्यार मेरा, संसार मेरा तुझसे कहता हूँ,
हे मेरे आश्रय स्थल साथ तेरे पलता हूँ।।४।।

मैं क्या हूँ मुझे तो कुछ मालूम ही नहीं,
तुम जो हो वही मैं हूँ बस तेरी छाया हूँ।
नन्हा मन बहल रहा, प्रेम की डोरी पर,
तेरे सपनों का सौदा हूँ, इतना कहता हूँ।।५।।
-देवनन्दन कुमार
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2 महीने पहले

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