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चक्र की तरह घूमता हूँ

                
                                                         
                            लोग मुझे भूल जाते हैं,
                                                                 
                            
मैं किसी को नहीं भूलता,
मैं बीतता जाता हूँ, परन्तु,
आगे बढ़ता ही रहता हूँ।
क्योंकि, मैं समय हूँ।।१।।

चक्र की तरह घूमता हूँ,
दिन पर दिन बीतता हूँ,
जीव देह जरूर छोड़ता,
पर मैं हर वक्त घूमता हूँ।
क्योंकि, मैं समय हूँ।।२।।

मुझे लोग कोसते रहते हैं,
ग़म में, वेदना में, दुःख में,
मैं किसी को नहीं कोसता,
कहीं, किसी भी हालत में।
क्योंकि, मैं समय हूँ।।३।।

जो लोग मुझे जान लेते,
पहचान कर अपना मानते,
वो कभी न जीत से जूझते,
हाशिल कर लेते उपलब्धि।
क्योंकि, मैं समय हूँ।।४।।
- देवनन्दन कुमार
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2 महीने पहले

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