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"दिल धड़कन में तुम हो"

                
                                                         
                            मेरे आँचल के छाया में, नव जीवन के राही हो।
                                                                 
                            
पग पग पर तेरे लिए मैं,दिल धड़कन में तुम हो।।१।।

रग - रग में दौड़ रही है, नस नस में लहू - धारा।
देखती तुझे जब जब मैं, उमड़ती स्नेह ये सारा।।२।।

नम आँखों में आश्रय है, मेरे जीवन में तुम हो।
निज स्वरूप लख रही, दिल धड़कन में तुम हो।।३।।

हां रूप सलोना बनकर, हृदय स्थल में तुम हो।
मां की ममता से निखरो, मेरे आँखों में तुम हो।।४।।

निहार रही तुझे दुनियां, कल के गौरव तुम हो।
मेरे सानिध्य में पलकर, मेरे धड़कन में तुम हो।।५।।

तुझ बिन मैं अधूरी थी, अब जीवन में तुम हो।
सुन रही थी ताने बाने, अब मन दर्पण तुम हो।।६।।

भला बुरा जितनी मेरी, सब प्रतिरूप तुम हो।
देख तुझे मन पावन, दिल धड़कन में तुम हो।।७।।

संकट के बादल छट गए, निर्मल मन तुम हो।
बदल रही जीवन हवा, मेरे आंगन में तुम हो।।८।।

मेरा मुन्ना राज दुलारा, खुशी के दीए तुम हो।
रौशन कर मन आंगन, हिय की मूर्ति तुम हो।।९।।

मन उपवन खिल उठी, चांद तारे भी तुम हो।
जीवन सम बगिया में, दिल धड़कन तुम हो।।१०।।
-देवनन्दन कुमार
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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