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चाह को राह जरूर मिलती है

                
                                                         
                            कोई खोज न ले मुझको, बदलते हुए मौसम में।
                                                                 
                            
सितारे ढूंढ न ले मुझको, गुजरते हुए सरगम में।।
कहीं पानी नहीं मिलती, यहां बेख़ौफ़ जमाने में।
चाह को राह मिलती, किस्मत को आजमाने में।।

ख़ुदा के घर देर है अंधेर नहीं, अर्जी लगा देना।
किस्मत बदल जाएगी हमेशा, मर्जी बता देना।।
दिनों बाद बात समझ आएगी, रूप देख लेना।
चाह को राह जरूर मिलती है, तुम परख लेना।।

तुम तो कोई गैर नहीं हो, रहबर के मरहूम हो।
अल्लाह के औलाद हो, चश्मदीद गवाह बन।।
मन मैला न कर भाईजान, तुम्हीं सरताज हो।
जिन्दगी में कोई ग़म न रखना, खुशहाल बन।।
-देवनन्दन कुमार
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3 महीने पहले

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