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"आ जा! मेरे आंगन में आ जा"

                
                                                         
                            आ जा! मेरे आंगन में आ जा।
                                                                 
                            
मुरझे मन में खुशी दिला जा, आ मेरे आंगन में आ जा।
नयनों में आंसू भर भर, बुला रही तुझे घर मेरे आ जा।।
मन फूलों से सजी रहेगी, आंगन में किलकारी भर जा।
तोतरी बोली बोल सुहावन, मन पावन पावन कर जा।।

हर जन - जन के मन छा जा।
भोली सूरत में खिलकर, प्रेम धारा का रूपक बन जा।
देखते ही मिटती पीड़ा मन से, सबकी नजरों में आ जा।।
घर घर की वैभव है तुझमें, सबके दिल की नूर बन जा।
मन फूलों से सजी रहेगी, आ मेरे चांद चमन में आ जा।।

आ मेरे मन आंगन में आ जा।
कितना सलोना सुन्दर रचना, जीवन की राही बन जा।
ढूंढ आई मैं तो हर गली तुझे, मेरी सच्ची राही बन जा।।
याद में तेरे आहें भरती रहती, आ मेरी पहचान बन जा।
आज खुशी से झूम रही हूँ, तूं आँचल की शान बन जा।।
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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