तुझे एक नज़र देखा मोहब्बत हो गई
अब तेरे साथ जीने की आदत हो गई
जिंदगी तेरे सहारे की मोहताज़ हो गई
मैं तो तेरी लिखी हुई किताब हो गई ll
तू भी ज़रा मोहब्बत जताया कर
मेरी गली के चक्कर लगाया कर
बार-बार दूर से न घूरो मुझे
कभी-कभी ख़ुद भी मुस्कुराया कर।।
अब रुठना -मनाना भी क्या
अकेले कहीं जाना भी क्या
तू चल ना बातें बनाने को
तेरे बिना मुस्कुराना भी क्या।।
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