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सीढ़ियाॅं

                
                                                         
                            मुझे बहुत पसन्द है मेरे घर का कोना
                                                                 
                            
जहां सीढ़ी बनी है तिकोना
नक्काशी, झरोखा और फूलदान
सीढ़ियों को बनाती हैं शानदार

यही जाती हैं, छत और बालकनी को
लौटती हैं आंगन और गली को
आने -जाने का काम निरन्तर करती है
पर जब देखो वहीं पड़ी रहती हैं

कई प्रकार कई नाम की होती हैं सीढ़ियाॅं
स्वर्ग और सफलता का मार्ग
भी होती हैं सीढ़ियाॅं
कभी तो जीते -जागते माॅं-बाप
भी बन जाते हैं बच्चों की सीढ़ियाॅं

चाहे पत्थर और काठ की
चाहे बाप के विश्वास की होती हैं सीढ़ियाॅं
कभी आकाश के उड़ान की,
स्वयं के पहचान की भी होती हैं सीढ़ियाॅं।।

 
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42 मिनट पहले

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