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मन का परिंदा

                
                                                         
                            मन का परिंदा
                                                                 
                            
आज निर्भीक है
इस जमाने से

बंदिशों की बेड़ियों को
बड़ी मुश्किल से काटा है

शब्द चुभते नहीं
अब मुझे तन्हाई में।।
-दीप्ति त्रिपाठी
 
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3 घंटे पहले

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