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सुकून मिल जाए

                
                                                         
                            काश मुझे कभी अपना पता मिल जाए,
                                                                 
                            
भटकी हुई रूह को ख़ुदा मिल जाए।

तुझे जी भर के देख लूँ इक नज़र,
मेरी हर साँस को दुआ मिल जाए।

तेरा मेरी ज़िंदगी में आना यूँ ही नहीं,
लगता है सदियों की दुआ मिल जाए।

न लफ़्ज़ चाहिए, न कोई वादा मुझे,
बस तेरी ख़ामोशी का इशारा मिल जाए।

सुना है तू चाहती है मुझे ख़ुद से भी ज़्यादा,
काश तेरे दिल में मेरा ठिकाना मिल जाए।

मोहब्बत मुकम्मल हो या अधूरी रहे,
रूह को तेरी याद का सहारा मिल जाए।

न जन्नत की ख़्वाहिश, न दौलत का गुरूर,
तेरे इश्क़ में जीने का हौसला मिल जाए।

जब आख़िरी सफ़र पर निकलूँ मैं "दीप",
तेरी दुआओँ का एक उजाला मिल जाए।
-दीपक शर्मा "दीप"
 
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3 महीने पहले

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