जिंदगी बेबुनियाद है तब तक
कुछ स्याही के गोले सही न होंगे जब तक
हर परिस्थिति का उपहास करेंगे लोग तब तक
कुछ स्याही के गोले सही न होंगे जब तक
कुछ अपना बोलकर खिलाफ़ खङे होंगे
कुछ स्याही के गोले सही न होंगे जब तक
हर लम्हा, हर दर्द तन्हाई में हैं तब तक
कुछ स्याही के गोले सही न होंगे जब तक
ये कहानी हिस्सा रहेगी जिंदगी में तब तक
हार ना मानेंगे जब तक
हर वो दो मुखी चेहरे भी साथ होंगे तब तक
मंज़िल पर पहुंचने का सही समय होगा जब तक ।।
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