आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

प्रेम गीत गाओ

                
                                                         
                            सपनो में तो आते हो हकीकत में कभी आओ
                                                                 
                            
एक बार नहीं आ सकते तो फिर किश्तों में ही आ जाओ

दुनियां की निगाहों से कुछ दूर चले जाओ
न कोई तुम्हें देखे पर मुझ को नज़र आओ

अरमान जो सोएं हैं उनको जगा जाओ
करना कुछ और नहीं तुम सिर्फ मुस्कुराओ

सुन्दर सा साज कोई हाथ में उठाओ
दिल की धड़कनो की धुन पर गुनगुनाओ

सांसो की सरगम पर राग तुम सुनाओ
यूँ ही कुछ बोल तुम बोले चले जाओ

नाचते गाते हुए मस्ती में थिरक जाओ
तुम छोड़ के सब बंधन बस मुझ में समा जाओ

मेरे साथ आओ प्रेम गीत गाओ
दुनिया को बेहतर तुम साथ में बनाओ


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर