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दिन-ब-दिन

                
                                                         
                            तन्हाइयों की परछाइयाँ दिन-ब-दिन लंबी होती जा रही हैं
                                                                 
                            
समंदर की सांसे गहरी होती जा रही हैं
समंदर की लहरें कुछ दिनों से उदास नजर आ रही हैं
वजह किसी को भले ही न पता हो
पर उस खंडहार को जरूर पता है
क्योंकि अश्कों की कीमत वो भी कभी चुका चुके हैं I
आसमान के एक कोने पे एक सितारे
साँझ की बेला हमेशा समंदर की ओर
छुप-छुप के देखती थी ,मुस्कुराती थी
बहुत दिन हो गए, वह लापता हैं…

खैर लापातगंज का तो पता नहीं
वरना हम लहरों के कमसिन होठों पर
एक अलबेला मुस्कुराहट जरूर लाते
उन सितारे को, साथ समंदर पार वाकई ढूंढ लाते I
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3 महीने पहले

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