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“भाषा का नाता “

                
                                                         
                            मैं पंजाबी की ज़ाया,
                                                                 
                            
बन बैठी हिन्दी की काया ।
मुझ पर यूँ प्रश्न उठाते हो?
हो कर पंजाबी की,हिंदी में बतलाते हो?
पहला अक्षर बोला गर पंजाबी में,
तो दूजा मैंने सीखा है हिंदी में ।
एक मेरे बचपन की भाषा है,
दूजी मेरे सपनों की अभिलाषा है ।
दोनों के बंधन में बँधी इस क़दर मैं,
अटूट इन दोनों से मेरा नाता है ।
लिखती हूँ गर हिंदी में,
तो मेरा सुर पंजाबी में गाता है ।
कोई तर्क नहीं बनता टकराव का इनमें,
मेरा मन दोनों के साथ समय बिताता है ।
मुझमें दोनों का है रंग समाया,
दोनों को मैंने है खुद में पाया ।
एक गर मेरी भूख मिटाती है,
दूजी मेरी प्यास बुझाती है ।
है बेहद लगाव मुझे पंजाबी से,
पर हिंदी भी मुझे ख़ूब लुभाती है ।
झुठला नहीं सकती कि दोनों मुझमें एक हैं,
अगर न समझो इस बात को,
“दविंदर” फिर भाषाएँ अनेक हैं ।
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8 घंटे पहले

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