संग आपके रहने की आदत तो पड़ गई
ये न सोचिए कि हमारी गैरत ही मर गई
भीड़ है बहुत सम्हल के बोलें हजूर
उम्र हमारी भी साठ पार कर गई।
-ब्रजभूषण वर्मा
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