कितनी सुंदर है हकीकत कितना सुंदर है फ़साना
तुमको तो हम भूल चुके हैं हमको भी तुम भूल जाना।
जुदा हुए हो हमसे तुम तो घबराहट भी हो सकती है
आँसू जब आँखों में हों मंदिर में तुम फूल चढ़ाना ।
कस्ती फूलों की वैसे तो सब को अच्छी लगती है
कस्ती हो कांटों की फिर भी प्रभु को तुम भूल न जाना
चलती फिरती रूह है हम सबआते जाते रहते हैं
मिल भी जाओ राहों में तुम अपने मन का दीप जलाना ।
खोई खोई नजरें मुझको सब की अच्छी लगती हैं
जब खो जाओ इस जग में सुंदर सा फूल खिलाना।
मेरे मन की बात तो हरदम अधूरी रहती है
जब हो पूरी बात तुम्हारी सपनों में आनाजाना।
मेरा क्या है मै तो कुछ भी लिखता विखता रहता हूँ।
तुमने भी कोई गजल लिखी हो अमर उजाला में छपवाना।
ब्रज की गलियाँ बिछड़ी है तो इतना मत अफसोस करो
बंशी बहुत बजाली तुमने तुम्हे ही है द्वारका सजाना।
-ब्रजभूषण वर्मा
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