आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आओ मिलकर दीप जलाएं

                
                                                         
                            आओ मिलकर दीप जलाएं
                                                                 
                            
सत्य अहिंसा की मिट्टी लेकर
नीर प्रीत से इसको मथ कर
ऐसा सुंदर दीप बनाएं, आओ मिलकर दीप जलाएं।।
ज्ञान की बत्ती इसमें रखकर
तेल त्याग का इसमें भरकर
घृणित तम को जहां भी पायें,
इस दीपक को वही जलाएं आओ मिलकर दीप जलाएं।।
जात पात का धर्म मिटाकर
सब जीवो पर दया दिखाकर
देश प्रेम डिगने का पाऐं, आओ मिलकर दीप जलाएं।।
करें प्रतिज्ञा आपस में मिलकर
साथ रहेंगे लड़कर झड़कर
दीप प्रेम का बुझने ना पाए, आओ मिलकर दीप जलाएं।।
कृषक हो चाहे व्यापारी
हो राजा. या हो दरबारी
परहित से कुछ तो अपना पुण्य कमाए, आओ मिलकर दीप जलाएं।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
11 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर