आओ मिलकर दीप जलाएं
सत्य अहिंसा की मिट्टी लेकर
नीर प्रीत से इसको मथ कर
ऐसा सुंदर दीप बनाएं, आओ मिलकर दीप जलाएं।।
ज्ञान की बत्ती इसमें रखकर
तेल त्याग का इसमें भरकर
घृणित तम को जहां भी पायें,
इस दीपक को वही जलाएं आओ मिलकर दीप जलाएं।।
जात पात का धर्म मिटाकर
सब जीवो पर दया दिखाकर
देश प्रेम डिगने का पाऐं, आओ मिलकर दीप जलाएं।।
करें प्रतिज्ञा आपस में मिलकर
साथ रहेंगे लड़कर झड़कर
दीप प्रेम का बुझने ना पाए, आओ मिलकर दीप जलाएं।।
कृषक हो चाहे व्यापारी
हो राजा. या हो दरबारी
परहित से कुछ तो अपना पुण्य कमाए, आओ मिलकर दीप जलाएं।
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