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वास्तविक मैं

                
                                                         
                            आइने खाली नहीं होते
                                                                 
                            
दीवार के उस तरफ भी
कोई झांक रहा था
वो मेरा रूप नहीं
मैं ही था, वास्तविक मैं
और वास्तविक मैं कभी बदलता नहीं
मैं बदल जाता हूं
कभी डर के कारण
तो कभी समय के साथ
मग़र वास्तविक मैं
मुझे याद दिलाता है
अपने उसूलों को
मेरे किए हर काम को
आइने खाली नहीं होते
वो भरे रहते हैं
उन यादों से
जो इस चेहरे ने देखे है
दीवार के उस तरफ भी
कोई झांक रहा था
जैसे मन में कोई आस छुपी हो
कुछ अधूरे रंज
और भविष्य की ताक छुपी हो
वो मैं, मैं नहीं था
वास्तविक मैं!
 
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2 महीने पहले

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