फिर से निराश हुआ भविष्य
फिर टूटे सपने अनगिनत
कब तक देखेंगे मौन खड़े
आओ मिलकर बोलें, "अब बस"
फिर गलत हुआ, अन्याय हुआ
युवा आज फिर असहाय हुआ
मेहनत का सबक था याद मगर
बेइमान का ऊंचा सर, हाय हुआ
सपने हुए धराशाई, दिल टूटे
अब कौन देने आये ढाढ़स
कब तक देखेंगे मौन खड़े
आओ मिलकर बोलें, "अब बस"
-चित्रा
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