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प्रेम का वृक्ष

                
                                                         
                            प्रेम का वृक्ष
                                                                 
                            

वृक्ष प्रेम का
अति पवित्र पावन
जीवन का अति उल्लास
मेघ का बरसता अनुपम सावन।।१
मन मयूर
नाच उठे जब
मन की लहर जगे जब
तन का इक संताप मिटे जब
लहरें समुन्दर की मन में उठे जब
होता है संगम सुन्दर सुरों का तब।।२
हर्षित मन
पुलकित तन
प्रफुल्लित उपवन
रिमझिम बरसता सावन
आसमान छूने की कोशिश में मन
यह है जीवन का एक अद्भुत संगम।।३
कोलाहल
करता जब मन
बंशी की धुन का आकर्षण
अतृप्त इच्छाओं का आगमन
कुछ खोने के भय से डरता मन
तब होता है पवित्र प्रेम का समर्पण
यह है इक जीवन का अद्भुत मंथन।।४
अंकुर
प्रेम का कोई
जब कभी फूटे
दुनिया से इक रिश्ता
गहराई में फिर जैसे छूटे
रह अकेला तृषित होता मन
होता यह जीवन का समुद्र मंथन
बड़ा कठोर है प्रेम का यह बंधन।।५
 
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2 महीने पहले

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