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सुहाग की रक्षा हित लाल चूड़ियां मंगल उदय करती हैं

                
                                                         
                            लाल रंग से रंगी चूड़ियां मन का ये भाव समझाती हैं।
                                                                 
                            
जिन हाथों में सजती हैं उन हाथों को पावन कर जाती है।।

पहनाने वाला भी हर्षित होता यही बहना को समझाता है।
लाज धर्म की सीख निराली पहनाते वक्त वो बताता है।।

तेज ओज धारण करना पति के अंतर्मन में बस जाना।
जीवन के हर संकट में तुम पति का हंसकर साथ निभाना।।

प्रेम संबंध की नींव अति गहरी चूड़ियां लाल तुम्हें बताती है।
सभ्यता संस्कृति सृजन संस्कार की राह हमें समझाती है।।

लाल रंग है मंमल का मंगल जिसका जीवन में हो जाता।
धन यश सुख भोग ऐश्वर्य का वह सारे सुख पा जाता।।

वैधव्य का दुःख क्या होता पति मरण से पता चलता है।
लाल रंग किसी सुहागिन के तन पर इसीलिए तो खिलता है।।

सौभाग्य शाली वह नारी जीवन भर पति जिसको मिलता है।
लाल जोड़ा हो या लाल सिंदूर भाग्य दर्पण वह कहलाता है।।

लाल चूड़ियों की खनक सुनते ही पति का क्रोध शांत हो जाता है।
सोया भाग्य इन लाल चूड़ियों से ही फिर फिर उदय हो जाता है।।

सुहाग की रक्षा हित लाल चूड़ियां मंगल उदय करती हैं,
सच्ची जीवन संगिनी वहीं नारी जो सच्ची पतिवृता कहलाती हैं।।

सत्य सनातन धर्म संस्कृति यही शिक्षा पग-पग हमें देती हैं।
इसीलिए भारत की नारी देवी रूप में पूजित यहां होती है।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय
 
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एक घंटा पहले

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