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खुद को दी गई शाबाशी

                
                                                         
                            विषय खुद को दी गई शबाशी
                                                                 
                            

हमने ज़िन्दगी में क्या किया ज़िन्दगी हमें बताती है,
लहरें समुन्दर में आती है कुछ कहकर चली जाती हैं।
हमने खुद से क्या वादा किया उम्मीदें हमें बताती हैं,
ज़िन्दगी में हर सफलता पर शाबाशी
मिल जाती है।।

सोचों जरा तुमने खुद से कुछ वादा किया होगा कभी,
उस वादे की उम्मीदों पर खरे उतर सके हो तुम कभी?
सपने तुमने बुने होंगे उन्हें कसोटी पर भी उतारा होगा,
इन्हीं सपनों की खातिर ही तो तुमने जीवन संवारा होगा।।

कुछ करने की ठानी होगी कुछ उम्मीदें तुमने पाली होंगी,
तुम्हारी जिन्दगी में यही खुशियां तुम्हारी निशानी होंगी।
कर्मठता की कसोटी पर तुमने खुद को खरा उतारा होगा,
परिस्थितियों के चंगुल से कुशलता से खुद को निकाला होगा।।

सोना जब कंचन बनता है उसे अग्नि में तपाया जाता है,
कड़ी मेहनत के बाद ही किसी फसल को उगाया जाता है।
यही होता है खुद से वादा जो खुद ही खुद से किया जाता,
जिसके सांचे में ढलकर जीवन का हर सपना पूरा होता।।

 
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एक घंटा पहले

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