भारत का वह सैनिक था ,
धन्य धन्य है मास्ता ।
हिंद भूमि के खातिर उनकी,
थी वतन पर आस्था।।१।।
कितने दिलों की धड़कन बने ,
वह मुरलीधर मास्ता ।
मां बापू के जीने का ,
बंद हुआ वह रास्ता ।।२।।
कितने नयनो से नीर बहा ,
जब समाचार यह सुने थे ।
अमर रहे मुरलीधर,
यह शब्द मुख से गूंजे थे।।३।।
जब शहीद हुए मुरलीधर ,
कितने पैर डगमग डोले थे ।
अमर रहे मुरलीधर,
यह नारा सब बोले थे ।।४।।
उन माता पिता की आत्मा ,
कितनी अंतर्यामी है।
सपूत का बलिदान देखा,
उनका जीवन स्वाभिमानी है ।।५।।
जिस कलेजे के टुकड़े को ,
छीन गया परमात्मा ।
कैसे शांत रही लाल बिना ,
माता-पिता की आत्मा ।।६।।
शहिद हुआ लाल जहां का,
धन्य धरा है धारता ।
जनसैलाब जिनकी याद में ,
गुम गया गांव धारता ।।७।।
शत - शत नमन तुम्हें ,
वीर मुरलीधर मास्ता ।
तेरी खातिर लिखी,
गर्व भरी दास्तां।।८।।
कवि - चन्दन सिंह सारंगदेवोत
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