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प्रेम का दिखावा

                
                                                         
                            प्रेम का सिलसिला,
                                                                 
                            
चलता आया युगो से।
प्राचीन काल में,
मानव प्रेम का भूखा था।

वर्तमानकाल मे,
अब प्रेम नहीं।
यह मोह माया बनी,
जान की दुश्मन।

प्रेम का दिखावा करती,
दुनिया लालची है।
अपने मतलब से,
दुनिया प्रेम करती हैं।

आज राम -भरत नही,
भाई भाई विभिषण है।
आज स्त्री प्रेमी मीरा नही,
आज की स्त्री लालची है।
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4 वर्ष पहले

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