चोट दिल पर लगी थी माँ,
आंख क्यों रोई थी।
चोट मुझे लगी थी माँ,
पर तुम क्यों रोई थी।
गलती हुई मुझसे माँ,
माफ तू कर देना।
भूल जाऊं तुझे तो,
चार थप्पड़ लगा याद दिला देना।
राह देखेगी माँ तू मेरी,
फिर भी मैं ना आया तो।
फोन लगाकर सच कहा दूंगा माँ,
तू थोड़ी देर रुक में जल्दी आया।
महफिल तेरे नाम की माँ,
एक दिन में सजा दूंगा।
तेरे प्यार के किस्से रख ,
सबके गम भुला दूंगा।
सूरज दिन सवार देता है माँ,
पर तूने मेरी जिंदगी सवार दी माँ।
चांद दुनिया रोशन करता है माँ,
पर तूने मेरी जिंदगी रोशन कर दी माँ।
मेरा स्वर्ग है मेरी माँ,
मेरी दुनिया है मेरी माँ।
मेरा प्यार है मेरी माँ,
मेरी जिंदगी है मेरी माँ।
मेरे चांद और सूरज है मेरी माँ,
मेरा सब कुछ है मेरी माँ,
मेरा आने वाला कल हैं मेरी माँ,
मेरा भविष्य है मेरी माँ।
मेरी कमज़ोरी है मेरी माँ,
मेरी दौलत है मेरी माँ।
मेरा सुख दुःख मेरी माँ,
संस्कारों की देवी है मेरी माँ।
- चन्दनसिंह सारंगदेवोत
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