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इंटरनेट का काल

                
                                                         
                            लिख रहा हूं कविता,
                                                                 
                            
पढ़ेगा कौन?
जमाना है इंटरनेट का ,
आगे बढ़ेगा कौन?

समय नही पास इनके,
जो कविता पढ़ सके।
व्हाट्सएप और इंस्टा से,
ध्यान कैसे हटा सके।

इंटरनेट के चक्कर में ,
घूमती है दुनिया मोबाइल मे।
सुबह ,शाम का पता नही,
घूसी रहती है रजाई में।

पिता बोले बेटे से,
परीक्षा तेरी सर पर है।
बेटा बोला हां पापा,
दोस्त मेरी घर पर हैं।

इंटरनेट के काल में,
बोलना, सुनना काम हुआ।
हाय! हैलो के चक्कर मे,
राम - राम बंद हुआ।


चंदन सिंह सारंगदेवोत राजपूत
 
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4 वर्ष पहले

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