बलात्कारी भेड़ीयो ने,
बेटी को अगवा किया।
देख रही थी दुनियां सारी,
किसी ने नहीं साथ दिया।
पहुंच गई मां बेटी बचाने,
मां को वहा राख मिली।
क्या गुनाह किया बेटी ने,
इतनी बड़ी उसे सजा मिली।
जिंदा जला दी भेड़ीयो ने,
मां तेरी लाडली बेटी को।
जब मां ने देखे हालात को,
वह नही देख सकी बेटी को।
यह देख मां को सदमा लगा,
वह डगमगाती गिर पड़ी।
मां को घर सुना लगा,
बेटी के बिना रो पड़ी।
पहुंच गई मां इंसाफ दिलाने ,
थाने और अदालत में ।
किसी ने मां की नही सुनी,
सबने की मां की बाते अनसुनी।
क्या कानून है देश का,
बेटी को इंसाफ नहीं मिला।
थाने में मां से रिश्वत मांगी थी,
कहा से देती मां वह तो अकेली थी।
कितनी बुरी थी किस्मत मां की,
पहले भगवान ने पति को छिन लिया।
पर आज गद्दारों ने ही ,
बेटी को मां से दूर किया ।
चंदन सिंह सारंगदेवोत राजपूत
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