शहर कितना भी विकसित हो जाए ,
शहर में रहने वाले शहरवासियों ,
हमेशा अपनी संस्कृति को समेटे हुए संजोए रखना।
अँधेरा चाहे कितना भी घना हो,
साहित्य का दीपक जलाकर
उजाला हमेशा रखना।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X