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तेरा रुमाल- पुरानी डायरी से

                
                                                         
                            ये तन्हाई और फिर तेरा ख्याल।                             
                                                                 
                            
आँखों में आँसू और तेरा रुमाल।।

तेरी घनी जुल्फों के वो साये।
कि मेरे जीने का फिर सवाल।।

शाम होते ही काम आ जाते है।
तेरे सुनहरे ख्वाब वो बेमिसाल।।

कितने नासमझ जो समझ न पाते।
तेरी खामोश निगाह के वो सवाल।।

लाखों है तैयार यूहीं कत्ल होने को ।
जाने कैसे कर देते हो ये कमाल।।

न वो कुछ कह पाए और न हम।
इस बात का रहा गुमनाम मलाल।।
         - बृज मोहन सिंह बिष्ट
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एक महीने पहले

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