ये ज़िंदगी का कारवाँ
जाने चला किस रास्ते
ना जाने किस उम्मीद में
किन मंज़िलों के वास्ते
ना लोग ही अपने यहां
है ना ही ये अपना जहां
इस मोड़ से आगे है क्या
ना जाने है जाना कहां
दूर सब सपने हुए
जो कभी बड़े पास थे
ये ज़िंदगी का कारवाँ...।
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