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कि पहुंच जाए वो मंज़िल पे

                
                                                         
                            साँसें छूट रहीं हैं फिर भी
                                                                 
                            
मौत से लड़ती मेरी माँ
खड़ा सामने यम है लेकिन
ना उससे डरती मेरी माँ
साँसें छूट रहीं हैं...।
क्षीण हो चुकी ऊर्जा फिर भी
है जूझ रही हर मुश्किल से
है अचेत पर कोशिश ये निरंतर
कि पहुंच जाए वो मंज़िल पे
जिजीविषा की इक मिसाल सी
बन कर उभरती मेरी माँ
साँसें छूट रहीं हैं...।
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एक घंटा पहले

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