इस आसमां के वीराने में
जहां ना चाँद सितारे भी मेरे
कैसे ही कटेगा यह जीवन
हे मां ममता के बिन तेरे।
यूं तो ज़मीं विशाल ये है अपनी
हैं लोग जाने पहचाने से
पर कहां स्नेह की वो गंगा
करे मुक्त जो ज़ख्मों से दुःख और ताने के
छूटा जीवन का ध्येय भी अब
टूटे सपने बिखरी राहें
है कौन सी ही मंज़िल अब मेरी
जहां कोई रस्ता देख रहा हो खोले बाँहे
ये सफ़र चलेगा अब कैसे
जब बस घनघोर अंधेरे संग मेरे
कैसे ही कटेगा यह जीवन...।
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